Dreams: बेशर्म बेबाक सपने

Hindi Poetry बेशर्म बेबाक सप

Dreams, a fragment of our imagination, dreams a reality of our existence, dreams that define our being our future, dreams that mark our abilities. We are what we dream ourselves to be.

लकीर सी सीधी ,सिमटी सपाट ज़िन्दगी

ना कोई हलचल

ना रंज-ओ-गम ना

किसी हरकत का नामोनिशां

सिकुड़ती शर्माती ज़िन्दगी की कलाई मरोड़ते

बेशर्म बेबाक सपने

 

अपनी मस्ती मे चूर

रंगीनियत पे मगरूर

ना बंदिश ना पर्दा

साहिल पे लहरो से सर पटकते

बेशर्म बेबाक सपने

 

हसरतों पर पड़ी धूल

एक फूँक से साफ़ कर

वीरान अंधेरो मे

चिराग से रोशन

दिल की सतह पे बुलबुले से फूटते

बेशर्म बेबाक सपने

 

दफ़ा हो की मुझे तेरी ज़रूरत नहीं

खुश हु इस हाल मे

भीड़ मे भी तन्हा अकेली

कम्बक्त फिर भी दामन न छोड़ते

बेशर्म बेबाक सपने

 

मेरे अलावा कोंन है तेरा

बोले ये तल्खी से

दो दिन का रैन बसेरा

किसी से उम्मीद ना क

र बाहें पकड़ जोरो से झकझोरते

बेशर्म बेबाक सपने

 

क्यों झिझके, क्यों है खोफ्ज़दा

ऊचाइया है तेरी

डर की परछाइयो से बाहर तो आ

बेजान जिस्म मे जान फूकते

बेशर्म बेबाक सपने

 

एक बार मोहब्त कर मुझसे

कुछ पलो को ही सही

बना के देख हमराही ,हमसफ़र, ,हमनवा

जीने की नई उम्मीद भरते

बेशर्म बेबाक सपने

– गरिमा नाग

 

 

This post is a part of Write Over the Weekend, an initiative for Indian Bloggers by BlogAdda.

Garima Nag
A compulsive traveler, voracious reader & habitual fashionista. Love to explore, live & laugh. Read More

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Comments

  1. few lines by me… please rply hw is it???

    टूट चुकी है जो साखे पेड़ों से,
    अक्सर घंटों उनकों मैं देखा करता हूँ,
    पता है ऐसी साखो पर फूल नहीं खिला करते,
    फिर भी एक उम्मीद में अब भी उनको सींचा करता हूँ.

    रेत सागर के किनारे कि जो सूख चुकी है,
    अक्सर घंटों उस पर मै लेटा करता हूँ,
    पता हैं ऐसी रेत से महल नहीं बना करते,
    फिर भी एक उम्मीद में उस रेत से घरौंदा बनने कि कोशिश करता हूँ.

    टुकड़े काँच के जो आइने से टूटे हैं,
    अक्सर हर कांच के टुकड़े मे सपनों के टुकड़े देखा करता हूँ,
    पता हैं मिल कर भी हर टुकड़ा अपनी तस्वीर बनाता हैं,
    फिर भी एक उम्मीद में हर टुकड़े को जोड़ा करता हूँ.

    जिंदगी जो हर घड़ी नए रंग दिखती हैं,
    अक्सर हर रंग से सन जाया करता हूँ,
    पता है ज़िंदगी के सारे लम्हे मेरे नही हो सकते,
    फिर भी एक उम्मीद में हर लम्हे में ज़िंदगी जीया करता हूँ..

  2. Goosebumps!

    Your thoughts, words, expressions are beautiful and inspiring. It is an extremely beautifully written poem Garima.

    Awesome work!!

  3. toooo gooood !!

    सिकुड़ती शर्माती ज़िन्दगी की कलाई मरोड़ते
    बेशर्म बेबाक सपने

    love these lines :)

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